झारखंड के हजारीबाग लोकसभा सीट को लेकर कांग्रेस नेता शिवलाल महतो ने अपनी दावेदारी की है. उनका कहना है कि जनादेश के आधार पर हजारीबाग सीट से लोकसभा 2019 का चुनाव लड़ने जा रहे हैं. साथ ही उन्हें पूरा भरोसा है कि कांग्रेस की आलाकमान उन्हें निराश नहीं करेगी
हजारीबाग लोकसभा सीट पर कांग्रेस नेता शिवलाल महतो ने अपनी दावेदारी की है. उन्हें हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र से लोकसभा चुनाव में टिकट के प्रबल दावेदार माने जा रहे है. महतो ने कहा है कि उनके साथ जनादेश है जो उन्हें इस क्षेत्र के लिए काम करने पर उनके साथ है. बता दें कि शिवलाल को वर्ष 2009 में लोकसभा चुनाव लड़ने का अनुभव प्राप्त है. वह उस वक्त जेएमएम की टिकट से चुनाव मैदान में उतरे थे.
कौन हैं शिवलाल महतो
शिवलाल महतो हजारीबाग में कांग्रेस के दिग्गज नेता माने जाते हैं. वर्तमान में अखिल भारतीय कुर्मी महासभा के राष्ट्रीय संरक्षण के पद पर कार्य कर रहे हैं. उन्होंने 28 वर्षों से लगातार सभी जाति, धर्म, युवाओं एवं बुजुर्गों के सामाजिक एवं राजनीतिक कार्य में शामिल रहे हैं. वहीं, शिवलाल महतो के परिवार का भी राजनीतिक जुड़ाव रहा है. उनके सुसर टेकलाल महतो पूर्व में गिरिडीह लोकसभा से सांसद रह चुके हैं. और उनके साले वर्तमान में हजारीबाग के मांडू विधानसभा क्षेत्र के विधायक हैं.
जातीय समीकरण के अनुसार भी शिवलाल महतो प्रबल दावेदार
हजारीबाग के जातीय समीकरण के अनुसार भी शिवलाल महतो को सीट का देवेदार माना जा रहा है. हजारीबाग लोकसभा में 4.5 लाख कुर्मी मतदाता है. कुर्मी और अल्पसंख्यक मतदाता ही यहां उम्मीदवार की जीत और हार की मुख्य भूमिका निभाते हैं. ऐसे में शिवलाल महतो कुर्मी जाति से आते हैं और वह वर्तमान में अखिल भारतीय कुर्मी महासभा के राष्ट्रीय संरक्षण के पद पर कार्य कर रहे हैं.
हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र में 5 विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं. इन 5 विधानसभा क्षेत्र में 3 विधानसभा क्षेत्र कुर्मी बहुल क्षेत्र है. बाकी 2 विधानसभा पिछड़ी जाति बहुल क्षेत्र माना जाता है. रामगढ़ विधानसभा, बड़कागांव विधानसभा और मांडू विधानसभा कुर्मी बाहुल्य क्षेत्र है. जिनमें रामगढ़ विधानसभा और मांडू विधानसभा में पिछले 50 वर्षों से कुर्मी जाति के विधायक हैं.
हजारीबाग लोकसभा सीट पर मतदाताओं का जातीय आंकड़ा
कुर्मीः 27.7 प्रतिशत
अल्पसंख्यक- 24 प्रतिशत
हरिजन- 7.5 प्रतिशत
आदिवासी- 7.4 प्रतिशत
यादव- 4.3 प्रतिशत
कुशवाहा- 1.8 प्रतिशत
वैश्य- 12.3 प्रतिशत
पंचपोनिया- 10.1 प्रतिशत
उच्च जाति- 4.9 प्रतिशत



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