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दिल्ली हिंसाः सरकार की नजर सोशल मीडिया पर, सॉफ्टवेयर से पहचाने जा रहे चेहरे

दिल्ली हिंसा में 40 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है. जबकि सैकड़ों लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. दिल्ली दंगा में लोगों के दुकान, मकान, रोजी-रोटी और अपनों को खोया है. हालांकि सरकार दंगा करनेवालों को सजा दिलाने की बात कर रही है. लेकिन जो लोग बेघर हो गए हैं और जिनकी दुनिया लूट चुकी है क्या वह फिर से अपनी जिंदगी को पटरी पर ला सकेंगे. दिल्ली हिंसा को लेकर बुधवार (12 मार्च) को लोकसभा में चर्चा हुई, जिसमें बीजेपी सरकार की ओर से सवालों के जवाब दिए गए. गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली दंगा पीड़ितों को न्याय दिलाने का आश्वासन दिया. उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि दंगा करनेवाले आरोपियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह किसी भी धर्म के हो, जाति के हो या किसी भी पार्टी के हो. जांच प्रक्रिया शुरू हो गई है. उन्होंने कहा '60 सोशल मीडिया अकाउंट 22 फरवरी को बनाए गए हैं और 26 फरवरी को वो सारे अकाउंट बंद कर दिए गए. पुलिस इन सभी की जांच कर रही है. पता लगाया जा रहा है इन सब के पीछे किसका हाथ है जो हिंसा भड़का रहे थे.' सॉफ्टवेयर से पहचाना जा रहा है चेहरा अमित शाह ने कहा कि सॉफ...

राजनीति के मंझे खिलाड़ी अरुण जेटली कभी नहीं जीत पाए लोकसभा चुनाव, ऐसा था उनका राजनीतिक सफर

बीजेपी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली के निधन देश की बड़ी क्षति मानी जा रही है. बीजेपी पार्टी समेत सभी दलों ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है. अरुण जेटली 9 अगस्त से दिल्ली एम्स अस्पताल में भर्ती थे. इस दौरान उनकी कई बार गंभीर हालत हुई थी लेकिन 23 अगस्त दोपहर को उन्होंने दिल्ली एम्स में अंतिम सांस ली. अरुण जेटली राजनीति के मंझे खिलाड़ी थे, लेकिन वह कभी भी लोकसभा चुनाव नहीं जीत सके. बीजेपी के इतने बड़े नेता होने के बावजूद वह कभी भी लोकसभा चुनाव में जीत हासिल नहीं कर पाए. 2014 में मोदी लहर में भी जेटली को लोकसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था. अरुण जेटली का जन्‍म 28 दिसंबर, 1952 को दिल्‍ली में हुआ था. उनके पिता पेशे से वकील थे. अरुण जेटली ने नई दिल्ली के सेंट जेवियर्स स्कूल से 1957-69 तक पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से बीकॉम किया. उन्‍होंने दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से 1977 में लॉ की पढ़ाई पूरी की.  अरुण जेटली लॉ की पढ़ाई के दौर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के छात्र नेता भी थे. डीयू में पढ़ाई के दौरान ही वह 1974 में डीयू स्टूडेंट यूनियन के अध...

JDU ने कहा- NDA में कॉमन मिनिमम प्रोग्राम की जरूरत नहीं, जानें क्या होता है 'Common Minimum Program'

एनडीए की अगुवाई बीजेपी पार्टी कर रही है. एनडीए की सहयोगी दल जेडीयू का कहना है कि गठबंधन में कॉमन मिनिमम प्रोग्राम की जरूरत अब नहीं रह गई है. क्योंकि, एनडीए में बीजेपी के पास पूर्ण बहुमत है तो ऐसे में कॉमन मिनिमम प्रोग्राम की जरूरत नहीं रह गई है. आपको बता दें कि, जेडीयू लगातार विवादित मुद्दों पर बीजेपी का विरोध कर रही है. जिसमें तीन तलाक, धारा 370 और 35ए का मामला शामिल है. जेडीयू इन सभी मुद्दों पर सरकार का साथ नहीं दिया है. हालांकि, अब कानून बनने के बाद जेडीयू इसे स्वीकार करने की बात कर रहा है. जेडीयू का कहना है कि अब यह कानून बन गया है और इसका सम्मान करना चाहिए. जेडीयू के नेता आरसीपी सिंह ने कहा है कि बीजपी को पूर्ण बहुमत मिला है, ऐसे में एनडीए के अंदर कॉमन मिनिमम प्रोग्राम की बाद अब नहीं रह गई है. इसकी अब जरूरत ही नहीं है. यह उस वक्त होता है जब सरकार चलाने वाले दल को पूर्ण बहुमत प्राप्त नहीं होता है. बीजेपी की सरकार जब 1996 में सहयोगी दलों के साथ बनी थी तब इस तरह के कॉमन मिनिमम प्रोग्राम होते थे. और उस वक्त जेडीयू के नेता जॉर्ज फर्नांडिस ने धारा 370 को हटाने को लेकर विरोध किया...

पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव का सटीक निष्कर्ष यहां पढ़ें...

पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के परिणाम सामने आ गए हैं. जिसमें बीजेपी को बड़ा झटका लगा है, वहीं कांग्रेस ने जोरदार वापसी की है. हालांकि इस विधानसभा चुनाव के कई निष्कर्ष हो सकते हैं. लेकिन इस निष्कर्ष को सही माना जा सकता है. विधानसभा चुनावों के नतीजों से यही निष्कर्ष निकलता है- 1. भारतीय जनता पार्टी के कांग्रेस-मुक्त भारत अभियान की हवा निकल गई है. जनता ने इसे अमित शाह का अहंकार समझा. 2. वोटर विकल्पहीन होना नहीं चाहता. एरोगेंसी की तुलना में अयोग्यता भारतीय राजनीति में स्वीकार्य रही है और रहेगी. 3. हिंसक हिंदुत्व , राम मंदिर और विकास की राजनीति साथ नहीं चल सकती 4. भाजपा ने खुद ही गोलपोस्ट 2024 से 2019 में शिफ्ट कर दिया है. 5. लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की धुरि में विपक्षी गोलबंदी को धन प्रवाह कल से शुरू होने वाला है. यानी प्रचार को अलग ट्रैजेक्ट्री पर ले जाकर प्रभावित करने की शाह कला काम नहीं करेगी. 6. नरेंद्र मोदी के लिए रेवड़ियां बांटने के अलावा विकल्प नहीं है. अर्थात अगले छह महीनों में कई ऐसे फैसले होंगे जिन्हें अर्थ नीति की कसौटी पर कसना बेकार होगा. 7. मायावती की ...

राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में यह थी बीजेपी की सबसे बड़ी गलती...

देश में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के परिणाम से बीजेपी को सबसे बड़ा झटका लगा है. जहां इस विधानसभा चुनाव में बीजेपी को सबसे बड़ा झटका लगा है. वहीं, कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में जबरदस्त वापसी की है. कांग्रेस जहां लगातार चुनाव हार रही थी वहीं, राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में जोरदार वापसी की है. बीजेपी अब इस हार की समीक्षा में जुट गई है. बीजेपी लगातार जीत का दावा कर रही थी. राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में इस बार भी सरकार बनाने के लिए तैयार थी. लेकिन चुनाव परिणामों ने बीजेपी की सारी तैयारियों पर पानी फेर दिया है. राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो बीजेपी ने यहां आठ बड़ी गलतियां की है, जिस वजह से उन्हें हार का सामना करना पड़ा. 1. ऐसा माना जा रहा है कि बीजेपी की सबसे बड़ी हार किसान का मुद्दा बना है. बीते वर्षों में किसानों का मुद्दा कांग्रेस ने जमकर उछाला है. और इस दौरान मध्य प्रदेश और राजस्थान में सरकार की काफी किरकिरी हुई है. लेकिन विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने इस हिसाब से डैमेज कंट्रोल करने का काम काफी कम गति से किया है. 2. मध्य प्रदेश और राजस्थान में किसान...

आयुष्मान भारत योजना या 'प्रधानमंत्री जन आरोग्य अभियान' से ऐसे मिलेगा लोगों को लाभ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 सितंबर को झारखंड के रांची से आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत की है. हालांकि इसका नाम बदलकर 'प्रधानमंत्री जन आरोग्य अभियान' (PM-JAY) कर दिया गया है. PM-JAY के तहत प्रत्‍येक परिवार को प्रतिवर्ष इलाज के लिए 5 लाख रुपये का बीमा कवर मिलेगा. इस योजना से देश के 10 करोड़ परिवारों यानी लगभग 50 करोड़ लोगों को लाभ प्राप्‍त होगा. प्रधानमंत्री जन आरोग्‍य योजना राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य बीमा योजना और वरिष्‍ठ नागरिक बीमा योजना की जगह लेगी. आपको इसका लाभ मिलेगा या नहीं इसका पता लगाने का तरीका बड़ा आसान है. आइए, आज हम आपको बताते हैं कि प्रधानमंत्री जन आरोग्‍य योजना के लाभार्थियों की सूची में आपका नाम है या नहीं इसका पता कैसे लगाएं. ऐसे ढुंढे अपना नाम प्रधानमंत्री जन आरोग्‍य योजना के लाभार्थियों की सूची में अपना नाम तलाशने के लिए आपको mera.pmjay.gov.in वेबसाइट पर जाना होगा. यहां मोबाइल नंबर वाले फॉर्म में अपना नंबर डालिए. नीचे वाले फॉर्म में ऊपर लिखा हुआ कैप्‍चा डालिए. अब सबसे नीचे जेनरेट ओटीपी बटन पर क्लिक करें. ओटीपी डालने के बाद एक दूसरा पेज खुलेगा जहां आपक...